लङ्काकाण्ड · छंद · छंद
मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक।।
मूल पाठ
मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक।।
मोह महा घन पटल प्रभंजन। संसय बिपिन अनल सुर रंजन।।1।।
स्रोत अभिलेख 6.115 · पुस्तक पृ. 895, 895
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे रघुकुलके स्वामी! सुन्दर हाथोंमें श्रेष्ठ धनुष और सुन्दर बाण धारण किये हुए आप मेरी रक्षा कीजिये। आप महामोहरूपी मेघसमूहके [उड़ानेके] लिये प्रचण्ड पवन हैं, संशयरूपी वनके [भस्म करनेके] लिये अग्रि हैं और देवताओंको आनन्द देनेवाले हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 895 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1मामभिरक्षय रघुकुल नायक। धृत बर चाप रुचिर कर सायक।।
English explanation
AI draft: O leader of Raghu’s lineage, protect me! You bear an excellent bow and hold a beautiful arrow in your hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मामभिरक्षय | मेरी रक्षा कीजिए | protect me |
| रघुकुल | रघु का वंश | Raghu’s royal lineage |
| नायक | हे नायक | O leader |
| धृत | धारण किए हुए | bearing |
| बर | श्रेष्ठ | excellent |
| चाप | धनुष | bow |
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| कर | हाथ में | in the hand |
| सायक | बाण | arrow |
2 मोह महा घन पटल प्रभंजन। संसय बिपिन अनल सुर रंजन।।1।।
English explanation
You are the mighty wind that disperses the vast clouds of delusion, the fire that burns the forest of doubt, and the giver of joy to the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोह | मोह | delusion |
| महा | विशाल | vast |
| घन | मेघ | clouds |
| पटल | समूह | mass |
| प्रभंजन | प्रचंड पवन | mighty wind |
| संसय | संशय | doubt |
| बिपिन | वन | forest |
| अनल | अग्नि | fire |
| सुर | देवता | gods |
| रंजन | आनंद देने वाले | giver of delight |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 6.115
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 895
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 895, 895
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।