लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी। सब बिधि सुखद परम हित जानी।।
मूल पाठ
सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी। सब बिधि सुखद परम हित जानी।।
उतरु काह दैहउँ तेहि जाई। उठि किन मोहि सिखावहु भाई।।
स्रोत अभिलेख 6.61 · पुस्तक पृ. 829, 831
भावार्थ
मूल पाठ के बादसब प्रकारसे सुख देनेवाला और परम हितकारी जानकर उन्होंने तुम्हें हाथ पकड़कर मुझे सौंपा था। मैं अब जाकर उन्हें क्या उत्तर दूँगा? हे भाई! तुम उठकर मुझे सिखाते (समझाते) क्यों नहीं?॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 831 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सौंपेसि मोहि तुम्हहि गहि पानी। सब बिधि सुखद परम हित जानी।।
English explanation
She took your hand and entrusted you to me, knowing me to be a giver of happiness in every way and your greatest well-wisher.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सौंपेसि | उन्होंने सौंपा | she entrusted |
| मोहि | मुझे | to me |
| तुम्हहि | तुम्हें | you |
| गहि | पकड़कर | taking hold of |
| पानी | हाथ | the hand |
| सब | सब | every |
| बिधि | प्रकार से | way |
| सुखद | सुख देने वाला | a giver of happiness |
| परम | परम | greatest |
| हित | हितैषी | well-wisher |
| जानी | जानकर | knowing |
2 उतरु काह दैहउँ तेहि जाई। उठि किन मोहि सिखावहु भाई।।
English explanation
What answer shall I give her when I go there? Brother, why do you not rise and tell me?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उतरु | उत्तर | answer |
| काह | क्या | what |
| दैहउँ | मैं दूँगा | shall I give |
| तेहि | उन्हें | her |
| जाई | जाकर | having gone |
| उठि | उठकर | rising |
| किन | क्यों नहीं | why not |
| मोहि | मुझे | me |
| सिखावहु | तुम सिखाते | you instruct |
| भाई | हे भाई | O brother |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 831
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 829, 831
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।