लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहु बिधि सिचत सोच बिमोचन। स्त्रवत सलिल राजिव दल लोचन।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसोचसे छुड़ानेवाले श्रीरामजी बहुत प्रकारसे सोच कर रहे हैं। उनके कमलकी पँखुड़ीके समान नेत्रोंसे [विषादके आँसुओंका] जल बह रहा है। [शिवजी कहते हैं—] हे उमा! श्रीरघुनाथजी एक (अद्वितीय) और अखण्ड (वियोगरहित) हैं। भक्तोंपर कृपा करनेवाले भगवान्ने [लीला करके] मनुष्यकी दशा दिखलायी है॥ ९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 831 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बहु बिधि सिचत सोच बिमोचन। स्त्रवत सलिल राजिव दल लोचन।।
उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपाल देखाई।।
स्रोत अभिलेख 6.61 · पुस्तक पृ. 829, 831
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बहु बिधि सिचत सोच बिमोचन। स्त्रवत सलिल राजिव दल लोचन।।
English explanation
Rama, the dispeller of sorrow, was troubled in many ways; tears streamed from his lotus-petal eyes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| सिचत | चिंता करते हुए | being troubled |
| सोच | शोक का | of sorrow |
| बिमोचन | निवारण करने वाले राम | Rama, the dispeller |
| स्त्रवत | बह रहा था | was streaming |
| सलिल | आँसुओं का जल | tear-water |
| राजिव | कमल | lotus |
| दल | पंखुड़ी | petal |
| लोचन | जैसे नेत्रों से | from eyes like |
2 उमा एक अखंड रघुराई। नर गति भगत कृपाल देखाई।।
English explanation
O Uma, the Lord of Raghu’s line is one and undivided; compassionate toward devotees, he displayed the human condition.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| एक | एक | one |
| अखंड | अविभाजित | undivided |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, Lord of Raghu’s line |
| नर | मनुष्य की | human |
| गति | दशा | condition |
| भगत | भक्तों के प्रति | toward devotees |
| कृपाल | कृपालु | compassionate |
| देखाई | दिखाई | displayed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 831
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 829, 831
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