लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अब अपलोकु सोकु सुत तोरा। सहिहि निठुर कठोर उर मोरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअब तो हे पुत्र! मेरा निष्ठुर और कठोर हृदय यह अपयश और तुम्हारा शोक दोनों ही सहन करेगा। हे तात! तुम अपनी माताके एक ही पुत्र और उसके प्राणाधार हो॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 830 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अब अपलोकु सोकु सुत तोरा। सहिहि निठुर कठोर उर मोरा।।
निज जननी के एक कुमारा। तात तासु तुम्ह प्रान अधारा।।
स्रोत अभिलेख 6.61 · पुस्तक पृ. 829, 831
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अब अपलोकु सोकु सुत तोरा। सहिहि निठुर कठोर उर मोरा।।
English explanation
Now, dear son, my pitiless, hard heart will bear disgrace and the grief of losing you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| अपलोकु | अपयश | disgrace |
| सोकु | शोक | grief |
| सुत | हे पुत्र | dear son |
| तोरा | तुम्हारा | for you |
| सहिहि | सहेगा | will bear |
| निठुर | निष्ठुर | pitiless |
| कठोर | कठोर | hard |
| उर | हृदय | heart |
| मोरा | मेरा | my |
2 निज जननी के एक कुमारा। तात तासु तुम्ह प्रान अधारा।।
English explanation
Dear brother, you are your mother’s only son and the support of her life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपनी | your own |
| जननी | माता | mother |
| के | के | of |
| एक | एकमात्र | only |
| कुमारा | पुत्र | son |
| तात | हे प्रिय | dear one |
| तासु | उनके | her |
| तुम्ह | तुम | you |
| प्रान | प्राणों का | of her life |
| अधारा | आधार | support |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 830
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 829, 831
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।