लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।
मूल पाठ
जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।
बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।
स्रोत अभिलेख 6.61 · पुस्तक पृ. 829, 831
भावार्थ
मूल पाठ के बादस्त्रीके लिये प्यारे भाईको खोकर, मैं कौन-सा मुँह लेकर अवध जाऊँगा? मैं जगत्में बदनामी भले ही सह लेता (कि राममें कुछ भी वीरता नहीं है जो स्त्रीको खो बैठे)। स्त्रीकी हानिसे [इस हानिको देखते] कोई विशेष क्षति नहीं थी॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 830 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जैहउँ अवध कवन मुहु लाई। नारि हेतु प्रिय भाइ गँवाई।।
English explanation
Having lost my dear brother for my wife’s sake, how could I face returning to Ayodhya?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जैहउँ | मैं जाऊँगा | I shall go |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| कवन | किस | what |
| मुहु | मुँह | face |
| लाई | लेकर | with |
| नारि | पत्नी सीता के | my wife Sita’s |
| हेतु | लिए | for the sake of |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| भाइ | भाई को | brother |
| गँवाई | खोकर | having lost |
2 बरु अपजस सहतेउँ जग माहीं। नारि हानि बिसेष छति नाहीं।।
English explanation
I would rather have borne disgrace in the world; losing my wife is not so great a loss by comparison.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बरु | बल्कि बेहतर होता | rather; it would have been better |
| अपजस | अपयश | disgrace |
| सहतेउँ | मैं सह लेता | I would have borne |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| नारि | पत्नी की | of one’s wife |
| हानि | हानि | loss |
| बिसेष | इतनी बड़ी | so great |
| छति | क्षति | a loss |
| नाहीं | नहीं है | is not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.61
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 830
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 829, 831
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।