लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोहहिं नभ छल बल बहु करहीं। कज्जल गिरि सुमेरु जनु लरहीं।।
मूल पाठ
सोहहिं नभ छल बल बहु करहीं। कज्जल गिरि सुमेरु जनु लरहीं।।
बुधि बल निसिचर परइ न पार् यो। तब मारुत सुत प्रभु संभार् यो।।
स्रोत अभिलेख 6.95 · पुस्तक पृ. 868, 869
भावार्थ
मूल पाठ के बाददोनों बहुत-से छल-बल करते हुए आकाशमें ऐसे शोभित हो रहे हैं मानो कज्जलगिरि और सुमेरु पर्वत लड़ रहे हों। जब बुद्धि और बलसे राक्षस गिराये न गिरा तब मारुति श्रीहनुमान्जीने प्रभुको स्मरण किया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 869 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोहहिं नभ छल बल बहु करहीं। कज्जल गिरि सुमेरु जनु लरहीं।।
English explanation
They made a striking sight in the sky, using many deceptive maneuvers and feats of strength, as though a soot-black mountain and Mount Sumeru were fighting.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोहहिं | शोभित होते थे | made a striking sight |
| नभ | आकाश में | in the sky |
| छल | छल-युक्तियाँ | deceptive maneuvers |
| बल | बल के प्रयोग | feats of strength |
| बहु | अनेक | many |
| करहीं | करते थे | were performing |
| कज्जल | काजल-जैसा काला | soot-black |
| गिरि | पर्वत | mountain |
| सुमेरु | सुमेरु पर्वत | Mount Sumeru, the golden mythical mountain |
| जनु | मानो | as though |
| लरहीं | लड़ रहे हों | were fighting |
2 बुधि बल निसिचर परइ न पार् यो। तब मारुत सुत प्रभु संभार् यो।।
English explanation
Hanuman could not overcome the demon Ravana through wit and strength; then the son of the wind remembered Lord Rama. Two verb forms are unusually split in the supplied text.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बुधि | बुद्धि से | through wit |
| बल | बल से | through strength |
| निसिचर | राक्षस रावण पर | the demon Ravana |
| परइ | पार पाने में | in overcoming |
| न | नहीं | not |
| पार् | सफल हो सके | could succeed |
| यो | भूतकालीन क्रिया का अंतिम अंश | past-tense verb ending |
| तब | तब | then |
| मारुत | पवन के | of the wind god |
| सुत | पुत्र—हनुमान | son—Hanuman |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम को | Lord Rama |
| संभार् | स्मरण किया | remembered |
| यो | भूतकालीन क्रिया का अंतिम अंश | past-tense verb ending |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.95
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 869
- सहायक विषय
- रावण-हनुमान्-युद्ध, रावणका माया रचना, रामजीद्वारा माया-नाश
- मुद्रित पृष्ठ
- 868, 869
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।