लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोनित स्त्रवत सोह तन कारे। जनु कज्जल गिरि गेरु पनारे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउसके काले शरीरसे रुधिर बहता हुआ ऐसी शोभा देता है, मानो काजलके पर्वतसे गेरूके पनाले बह रहे हों। उसे व्याकुल देखकर रीछ-वानर दौड़े। वे ज्यों ही निकट आये, त्यों ही वह हँसा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 838 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सोनित स्त्रवत सोह तन कारे। जनु कज्जल गिरि गेरु पनारे।।
बिकल बिलोकि भालु कपि धाए। बिहँसा जबहिं निकट कपि आए।।
स्रोत अभिलेख 6.69 · पुस्तक पृ. 838, 838
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सोनित स्त्रवत सोह तन कारे। जनु कज्जल गिरि गेरु पनारे।।
English explanation
Blood streaming over his dark body appeared like streams of red ochre flowing down a mountain black as soot.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोनित | रक्त | blood |
| स्त्रवत | बहता हुआ | streaming |
| सोह | शोभित होता है; दिखाई देता है | appears striking |
| तन | शरीर पर | on the body |
| कारे | काले | dark; black |
| जनु | मानो | as though |
| कज्जल | काजल जैसा काला | soot-black |
| गिरि | पर्वत | mountain |
| गेरु | लाल गेरू की | of red ochre |
| पनारे | बहती धाराएँ | flowing streams |
2 बिकल बिलोकि भालु कपि धाए। बिहँसा जबहिं निकट कपि आए।।
English explanation
Seeing Kumbhakarna distressed, the bears and monkeys rushed forward. He laughed as soon as the monkeys came near.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिकल | व्याकुल कुंभकर्ण को | Kumbhakarna distressed |
| बिलोकि | देखकर | seeing |
| भालु | भालू योद्धा | bear warriors |
| कपि | वानर योद्धा | monkey warriors |
| धाए | दौड़े | rushed forward |
| बिहँसा | वह हँसा | he laughed |
| जबहिं | जैसे ही | as soon as |
| निकट | पास | near |
| कपि | वानर | monkeys |
| आए | आए | came |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.69
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 838
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 838, 838
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।