लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
पुनि धनु तानि कोपि रघुनायक। छाँड़े अति कराल बहु सायक।।
मूल पाठ
पुनि धनु तानि कोपि रघुनायक। छाँड़े अति कराल बहु सायक।।
तनु महुँ प्रबिसि निसरि सर जाहीं। जिमि दामिनि घन माझ समाहीं।।
स्रोत अभिलेख 6.69 · पुस्तक पृ. 838, 838
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर श्रीरघुनाथजीने क्रोध करके धनुषको तानकर बहुत-से अत्यन्त भयानक बाण छोड़े। वे बाण कुम्भकर्णके शरीरमें घुसकर [पीछेसे इस प्रकार] निकल जाते हैं [कि उनका पता नहीं चलता], जैसे बिजलियाँ बादलमें समा जाती हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 838 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 पुनि धनु तानि कोपि रघुनायक। छाँड़े अति कराल बहु सायक।।
English explanation
Then Rama, leader of the Raghu lineage, angrily drew his bow and released many terribly fierce arrows.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then; again |
| धनु | धनुष | bow |
| तानि | तानकर | having drawn |
| कोपि | क्रोध में | in anger |
| रघुनायक | रघुकुल के नायक राम ने | Rama, leader of the Raghu lineage |
| छाँड़े | छोड़े | released |
| अति | अत्यंत | extremely |
| कराल | भयंकर | fearsome |
| बहु | अनेक | many |
| सायक | बाण | arrows |
2 तनु महुँ प्रबिसि निसरि सर जाहीं। जिमि दामिनि घन माझ समाहीं।।
English explanation
The arrows entered Kumbhakarna’s body and passed out again, like lightning disappearing into the midst of clouds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तनु | शरीर | body |
| महुँ | में | in; into |
| प्रबिसि | प्रवेश करके | having entered |
| निसरि | बाहर निकलकर | emerging |
| सर | बाण | arrows |
| जाहीं | चले जाते हैं | pass out; go |
| जिमि | जैसे | as; just as |
| दामिनि | बिजली | lightning |
| घन | बादलों के | of clouds |
| माझ | बीच | amid |
| समाहीं | समा जाती है | disappears into |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.69
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 838
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 838, 838
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।