लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोपि महीधर लेइ उपारी। डारइ जहँ मर्कट भट भारी।।
मूल पाठ
कोपि महीधर लेइ उपारी। डारइ जहँ मर्कट भट भारी।।
आवत देखि सैल प्रभू भारे। सरन्हि काटि रज सम करि डारे।।।
स्रोत अभिलेख 6.69 · पुस्तक पृ. 838, 838
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह क्रोध करके पर्वत उखाड़ लेता है और जहाँ भारी-भारी वानर योद्धा होते हैं, वहाँ डाल देता है। बड़े-बड़े पर्वतोंको आते देखकर प्रभुने उनको बाणोंसे काटकर धूलके समान (चूर-चूर) कर डाला॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 838 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कोपि महीधर लेइ उपारी। डारइ जहँ मर्कट भट भारी।।
English explanation
In anger he uprooted mountains and hurled them where the mighty monkey warriors stood.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोपि | क्रोध करके | in anger |
| महीधर | पर्वत | mountain |
| लेइ | लेकर | taking |
| उपारी | उखाड़कर | having uprooted |
| डारइ | फेंकता है | hurls |
| जहँ | जहाँ | where |
| मर्कट | वानर | monkey |
| भट | योद्धा | warriors |
| भारी | बड़े बलशाली | mighty |
2 आवत देखि सैल प्रभू भारे। सरन्हि काटि रज सम करि डारे।।।
English explanation
Seeing the massive mountains coming, Lord Rama cut them apart with arrows and reduced them to dust.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवत | आते हुए | coming |
| देखि | देखकर | having seen |
| सैल | पर्वतों को | the mountains |
| प्रभू | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| भारे | भारी, विशाल | massive; heavy |
| सरन्हि | बाणों से | with arrows |
| काटि | काटकर | having cut apart |
| रज | धूल | dust |
| सम | के समान | like |
| करि | बनाकर | making; reducing to |
| डारे | कर दिया | did completely |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.69
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 838
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 838, 838
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।