लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं। अस्तुति करहिं सुमन बहु बरषहिं।।
मूल पाठ
सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं। अस्तुति करहिं सुमन बहु बरषहिं।।
करि बिनती सुर सकल सिधाए। तेही समय देवरिषि आए।।
स्रोत अभिलेख 6.71 · पुस्तक पृ. 839, 840
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवता नगाड़े बजाते, हॢषत होते और स्तुति करते हुए बहुत-से फूल बरसा रहे हैं। विनती करके सब देवता चले गये। उसी समय देवॢष नारद आये॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 840 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुर दुंदुभीं बजावहिं हरषहिं। अस्तुति करहिं सुमन बहु बरषहिं।।
English explanation
The gods sound kettledrums and rejoice; they offer praise and shower abundant flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुर | देवता | the gods |
| दुंदुभीं | दुंदुभियाँ; नगाड़े | kettledrums |
| बजावहिं | बजाते हैं | sound; play |
| हरषहिं | आनंदित होते हैं | rejoice |
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| करहिं | करते हैं | offer; perform |
| सुमन | फूल | flowers |
| बहु | बहुत-से | many; abundant |
| बरषहिं | बरसाते हैं | shower down |
2 करि बिनती सुर सकल सिधाए। तेही समय देवरिषि आए।।
English explanation
After offering their supplication, all the gods departed. At that very time, the divine sage Narada arrived.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करि | करके | having made |
| बिनती | विनती; प्रार्थना | supplication; prayer |
| सुर | देवता | gods |
| सकल | सभी | all |
| सिधाए | चले गए | departed |
| तेही | उसी | that very |
| समय | समय | time |
| देवरिषि | देवर्षि नारद | Narada, the divine sage |
| आए | आए | arrived |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 840
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 839, 840
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।