लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
परे भूमि जिमि नभ तें भूधर। हेठ दाबि कपि भालु निसाचर।।
मूल पाठ
परे भूमि जिमि नभ तें भूधर। हेठ दाबि कपि भालु निसाचर।।
तासु तेज प्रभु बदन समाना। सुर मुनि सबहिं अचंभव माना।।
स्रोत अभिलेख 6.71 · पुस्तक पृ. 839, 840
भावार्थ
मूल पाठ के बादवानर-भालू और निशाचरोंको अपने नीचे दबाते हुए वे दोनों टुकड़े पृथ्वीपर ऐसे पड़े जैसे आकाशसे दो पहाड़ गिरे हों। उसका तेज प्रभु श्रीरामचन्द्रजीके मुखमें समा गया। [यह देखकर] देवता और मुनि सभीने आश्चर्य माना॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 840 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 परे भूमि जिमि नभ तें भूधर। हेठ दाबि कपि भालु निसाचर।।
English explanation
The two pieces fell to the ground like mountains falling from the sky, pinning monkeys, bears, and demons beneath them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परे | गिरे | fell |
| भूमि | धरती पर | to the ground |
| जिमि | जैसे | like |
| नभ | आकाश | sky |
| तें | से | from |
| भूधर | पर्वत | mountains |
| हेठ | नीचे | beneath |
| दाबि | दबाकर | pinning; crushing beneath |
| कपि | वानरों को | monkeys |
| भालु | भालुओं को | bears |
| निसाचर | राक्षसों को | demons |
2 तासु तेज प्रभु बदन समाना। सुर मुनि सबहिं अचंभव माना।।
English explanation
Kumbhakarna’s radiance entered Rama’s mouth; all the gods and sages regarded this as a wonder.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तासु | उसका | his |
| तेज | तेज; ज्योति | radiance |
| प्रभु | प्रभु राम के | of Lord Rama |
| बदन | मुख में | into the mouth |
| समाना | समा गया | merged; entered |
| सुर | देवताओं ने | the gods |
| मुनि | मुनियों ने | the sages |
| सबहिं | सभी ने | all |
| अचंभव | आश्चर्य | a wonder |
| माना | माना | regarded as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 840
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 839, 840
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।