लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो सिर परेउ दसानन आगें। बिकल भयउ जिमि फनि मनि त्यागें।।
मूल पाठ
सो सिर परेउ दसानन आगें। बिकल भयउ जिमि फनि मनि त्यागें।।
धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब प्रभु काटि कीन्ह दुइ खंडा।।
स्रोत अभिलेख 6.71 · पुस्तक पृ. 839, 840
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह सिर रावणके आगे जा गिरा। उसे देखकर रावण ऐसा व्याकुल हुआ जैसे मणिके छूट जानेपर सर्प। कुम्भकर्णका प्रचण्ड धड़ दौड़ा, जिससे पृथ्वी धँसी जाती थी। तब प्रभुने काटकर उसके दो टुकड़े कर दिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 840 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सो सिर परेउ दसानन आगें। बिकल भयउ जिमि फनि मनि त्यागें।।
English explanation
That head fell before Ravana. He became distraught, like a serpent deprived of its jewel.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| सिर | सिर | head |
| परेउ | गिरा | fell |
| दसानन | दस सिरों वाले रावण के | of ten-headed Ravana |
| आगें | सामने | before; in front |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| भयउ | हो गया | became |
| जिमि | जैसे | as; like |
| फनि | सर्प | serpent |
| मनि | मणि | jewel |
| त्यागें | छूट जाने पर | upon losing |
2 धरनि धसइ धर धाव प्रचंडा। तब प्रभु काटि कीन्ह दुइ खंडा।।
English explanation
His torso rushed with tremendous force, making the earth sink; then Rama cut it into two pieces.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धरनि | धरती | earth |
| धसइ | धँसती है | sinks; caves in |
| धर | धड़ | torso |
| धाव | दौड़ा | rushed |
| प्रचंडा | प्रचंड वेग से | with tremendous force |
| तब | तब | then |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| काटि | काटकर | having cut |
| कीन्ह | कर दिया | made |
| दुइ | दो | two |
| खंडा | टुकड़े | pieces |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 840
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 839, 840
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