लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सरन्हि भरा मुख सन्मुख धावा। काल त्रोन सजीव जनु आवा।।
मूल पाठ
सरन्हि भरा मुख सन्मुख धावा। काल त्रोन सजीव जनु आवा।।
तब प्रभु कोपि तीब्र सर लीन्हा। धर ते भिन्न तासु सिर कीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 6.71 · पुस्तक पृ. 839, 840
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुखमें बाण भरे हुए वह [प्रभुके] सामने दौड़ा। मानो कालरूपी सजीव तरकस ही आ रहा हो। तब प्रभुने क्रोध करके तीक्ष्ण बाण लिया और उसके सिरको धड़से अलग कर दिया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 840 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सरन्हि भरा मुख सन्मुख धावा। काल त्रोन सजीव जनु आवा।।
English explanation
With his mouth full of arrows, he charged straight ahead, as though Death’s quiver had come alive and approached. (The reading ‘त्रोन’ is uncertain.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सरन्हि | बाणों से | with arrows |
| भरा | भरा हुआ | filled |
| मुख | मुख | mouth |
| सन्मुख | सीधे सामने | straight ahead |
| धावा | दौड़ा; धावा किया | rushed; charged |
| काल | काल का | of Death |
| त्रोन | तरकश | quiver |
| सजीव | जीवित हो उठा | come alive |
| जनु | मानो | as though |
| आवा | आ गया | had come |
2 तब प्रभु कोपि तीब्र सर लीन्हा। धर ते भिन्न तासु सिर कीन्हा।।
English explanation
Then Rama, angered, took a sharp arrow and severed his head from his torso.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| कोपि | क्रोध करके | becoming angry |
| तीब्र | तीखा; प्रबल | sharp; powerful |
| सर | बाण | arrow |
| लीन्हा | लिया | took |
| धर | धड़ | torso |
| ते | से | from |
| भिन्न | अलग | separate |
| तासु | उसका | his |
| सिर | सिर | head |
| कीन्हा | कर दिया | made; rendered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.71
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 840
- सहायक विषय
- कुम्भकर्ण-युद्ध और उसकी परमगति
- मुद्रित पृष्ठ
- 839, 840
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।