लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु सुरपति कपि भालु हमारे। परे भूमि निसचरन्हि जे मारे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे देवराज! सुनो, हमारे वानर-भालू, जिन्हें निशाचरोंने मार डाला है, पृथ्वीपर पड़े हैं। इन्होंने मेरे हितके लिये अपने प्राण त्याग दिये। हे सुजान देवराज! इन सबको जिला दो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 894 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनु सुरपति कपि भालु हमारे। परे भूमि निसचरन्हि जे मारे।।
मम हित लागि तजे इन्ह प्राना। सकल जिआउ सुरेस सुजाना।।
स्रोत अभिलेख 6.114 · पुस्तक पृ. 894, 894
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनु सुरपति कपि भालु हमारे। परे भूमि निसचरन्हि जे मारे।।
English explanation
AI draft: Listen, king of the gods! Our monkeys and bears who were killed by the demons lie on the ground.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| सुरपति | हे देवताओं के राजा इंद्र | O Indra, king of the gods |
| कपि | वानर | monkeys |
| भालु | भालू | bears |
| हमारे | हमारे | our |
| परे | पड़े हैं | lie fallen |
| भूमि | भूमि पर | on the ground |
| निसचरन्हि | राक्षसों द्वारा | by the demons |
| जे | जो | who |
| मारे | मारे गए | were killed |
2 मम हित लागि तजे इन्ह प्राना। सकल जिआउ सुरेस सुजाना।।
English explanation
They gave up their lives for my sake. O wise king of the gods, restore them all to life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मम | मेरे | my |
| हित | हित के लिए | benefit |
| लागि | के लिए | for the sake of |
| तजे | त्याग दिए | gave up |
| इन्ह | इन्होंने | these warriors |
| प्राना | प्राण | their lives |
| सकल | सबको | all of them |
| जिआउ | जीवित कर दो | restore to life |
| सुरेस | हे देवराज इंद्र | O Indra, lord of the gods |
| सुजाना | सुजान; विवेकी | wise and discerning |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.114
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 894
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 894, 894
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।