लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु खगेस प्रभु कै यह बानी। अति अगाध जानहिं मुनि ग्यानी।।
मूल पाठ
सुनु खगेस प्रभु कै यह बानी। अति अगाध जानहिं मुनि ग्यानी।।
प्रभु सक त्रिभुअन मारि जिआई। केवल सक्रहि दीन्हि बड़ाई।।
स्रोत अभिलेख 6.114 · पुस्तक पृ. 894, 894
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[काकभुशुण्डिजी कहते हैं—] हे गरुड़! सुनिये, प्रभुके ये वचन अत्यन्त गहन (गूढ़) हैं। ज्ञानी मुनि ही इन्हें जान सकते हैं। प्रभु श्रीरामजी त्रिलोकीको मारकर जिला सकते हैं। यहाँ तो उन्होंने केवल इन्द्रको बड़ाई दी है॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 894 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनु खगेस प्रभु कै यह बानी। अति अगाध जानहिं मुनि ग्यानी।।
English explanation
Listen, Garuda, king of birds! Wise sages recognize this utterance of the Lord as exceedingly profound.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनो | listen |
| खगेस | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| कै | की | of |
| यह | यह | this |
| बानी | वाणी | utterance |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| अगाध | गूढ़; जिसकी गहराई नापी न जाए | unfathomably profound |
| जानहिं | जानते हैं | recognize |
| मुनि | मुनि | sages |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
2 प्रभु सक त्रिभुअन मारि जिआई। केवल सक्रहि दीन्हि बड़ाई।।
English explanation
The Lord can slay and revive the three worlds; he merely bestowed the honor on Indra.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| सक | सकते हैं | can |
| त्रिभुअन | तीनों लोकों को | the three worlds |
| मारि | मारकर | having slain |
| जिआई | फिर जीवित करना | bring back to life |
| केवल | केवल | merely |
| सक्रहि | इंद्र को | to Indra |
| दीन्हि | दी | gave |
| बड़ाई | बड़ाई; यश | honor; credit |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.114
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 894
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 894, 894
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।