लङ्काकाण्ड · दोहा 113 · दोहा
अब करि कृपा बिलोकि मोहि आयसु देहु कृपाल।
अब करि कृपा बिलोकि मोहि आयसु देहु कृपाल।
काह करौं सुनि प्रिय बचन बोले दीनदयाल॥ ११३॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.113 · पुस्तक पृ. 892, 893
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1अब करि कृपा बिलोकि मोहि आयसु देहु कृपाल।
एआई-प्रारूप: हे कृपालु प्रभु, अब कृपा करके मेरी ओर देखिए और मुझे आज्ञा दीजिए।
English explanation
AI draft: O compassionate Lord, now look upon me with grace and give me your instruction.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अब | अब | now |
| करि | करके | having shown |
| कृपा | कृपा | grace; kindness |
| बिलोकि | देखकर; दृष्टि डालकर | looking upon |
| मोहि | मुझे; मेरी ओर | me; upon me |
| आयसु | आज्ञा; निर्देश | command; instruction |
| देहु | दीजिए | please give |
| कृपाल | हे कृपालु प्रभु | O compassionate Lord |
2काह करौं सुनि प्रिय बचन बोले दीनदयाल॥ ११३॥
“मैं क्या करूँ?” ये प्रिय वचन सुनकर दीनों पर दया करने वाले राम बोले।
English explanation
“What should I do?” Hearing these dear words, Rama, compassionate toward the distressed, spoke.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काह | क्या | what |
| करौं | मैं करूँ | should I do |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रिय | प्रिय; मनभावन | dear; pleasing |
| बचन | वचन; बातें | words |
| बोले | बोले | spoke |
| दीनदयाल | दीनों पर दया करने वाले राम | Rama, compassionate toward the distressed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 113
- स्रोत अभिलेख
- 6.113
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 892, 893
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।