लङ्काकाण्ड · दोहा 112 · दोहा
अनुज जानकी सहित प्रभु कुसल कोसलाधीस।
अनुज जानकी सहित प्रभु कुसल कोसलाधीस।
सोभा देखि हरषि मन अस्तुति कर सुर ईस॥ ११२॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.112 · पुस्तक पृ. 891, 892
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1अनुज जानकी सहित प्रभु कुसल कोसलाधीस।
एआई प्रारूप: छोटे भाई लक्ष्मण और जानकी सहित कोसल के स्वामी प्रभु राम कुशल हैं।
English explanation
AI draft: Lord Rama, ruler of Kosala, is well, together with his younger brother Lakshmana and Janaki.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अनुज | छोटे भाई लक्ष्मण | his younger brother Lakshmana |
| जानकी | जानकी, जनक की पुत्री सीता | Janaki, Sita, daughter of Janaka |
| सहित | के साथ | together with |
| प्रभु | स्वामी राम | Lord Rama |
| कुसल | कुशल हैं | is well |
| कोसलाधीस | कोसल के अधिपति राम | Rama, ruler of Kosala |
2सोभा देखि हरषि मन अस्तुति कर सुर ईस॥ ११२॥
उनकी शोभा देखकर देवताओं के स्वामी इंद्र मन में हर्षित होकर स्तुति करते हैं।
English explanation
Seeing their splendor, Indra, lord of the gods, rejoices inwardly and offers praise.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोभा | शोभा; सुंदर छवि | splendor; beautiful appearance |
| देखि | देखकर | having seen |
| हरषि | हर्षित होकर | rejoicing |
| मन | मन में | in his heart |
| अस्तुति | स्तुति; गुणों का गान | praise; a hymn of praise |
| कर | करते हैं | offers |
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| ईस | स्वामी, यहाँ इंद्र | lord, here Indra |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 112
- स्रोत अभिलेख
- 6.112
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 891, 892
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