लङ्काकाण्ड · दोहा 114 (क) · दोहा
सुमन बरषि सब सुर चले चढ़ि चढ़ि रुचिर बिमान।
सुमन बरषि सब सुर चले चढ़ि चढ़ि रुचिर बिमान।
देखि सुअवसर प्रभु पहिं आयउ संभु सुजान॥ ११४ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.114 · पुस्तक पृ. 894, 894
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1सुमन बरषि सब सुर चले चढ़ि चढ़ि रुचिर बिमान।
AI-निर्मित अर्थ-प्रारूप: फूल बरसाकर सभी देवता अपने-अपने सुंदर विमानों पर चढ़कर चले गए।
English explanation
AI-generated draft meaning: Showering flowers, all the gods departed, each boarding a beautiful celestial vehicle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमन | फूल | flowers |
| बरषि | बरसाकर | having showered |
| सब | सभी | all |
| सुर | देवता | gods |
| चले | चले गए | departed |
| चढ़ि | चढ़कर | boarding |
| चढ़ि | अपने-अपने चढ़कर | each boarding |
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| बिमान | दिव्य विमान | celestial vehicles |
2देखि सुअवसर प्रभु पहिं आयउ संभु सुजान॥ ११४ (क)॥
सुअवसर देखकर सुजान शिव प्रभु राम के पास आए।
English explanation
Seeing a favorable opportunity, wise Shiva came to Lord Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| सुअवसर | अनुकूल अवसर | a favorable opportunity |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| पहिं | के पास | to the presence of |
| आयउ | आए | came |
| संभु | शिव | Shiva |
| सुजान | सुजान; विवेकी | wise; discerning |
| क | दोहा ११४ के प्रथम भाग का संदर्भ-चिह्न | reference marker for the first part of verse 114 |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 114 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.114
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 894, 894
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।