लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सुत बचन भरोसा आवा। प्रीति समेत अंक बैठावा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दपुत्रके वचन सुनकर रावणको भरोसा आ गया। उसने प्रेमके साथ उसे गोदमें बैठा लिया। विचार करते-करते ही सबेरा हो गया। वानर फिर चारों दरवाजोंपर जा लगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 820 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि सुत बचन भरोसा आवा। प्रीति समेत अंक बैठावा।।
करत बिचार भयउ भिनुसारा। लागे कपि पुनि चहूँ दुआरा।।
स्रोत अभिलेख 6.49 · पुस्तक पृ. 819, 820
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनि सुत बचन भरोसा आवा। प्रीति समेत अंक बैठावा।।
English explanation
Hearing his son’s words, Ravana regained confidence and seated him lovingly in his lap.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुत | पुत्र मेघनाद के | of his son Meghnada |
| बचन | वचन | words |
| भरोसा | भरोसा; विश्वास | confidence; assurance |
| आवा | आया; हुआ | arose; came |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| समेत | सहित | with |
| अंक | गोद में | in his lap |
| बैठावा | बैठाया | seated him |
2 करत बिचार भयउ भिनुसारा। लागे कपि पुनि चहूँ दुआरा।।
English explanation
While they deliberated, dawn arrived. The monkeys again began attacking all four gates.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करत | करते हुए | while doing |
| बिचार | विचार; मंत्रणा | deliberation; consultation |
| भयउ | हो गया | became; arrived |
| भिनुसारा | भोर; प्रातःकाल | dawn; daybreak |
| लागे | आक्रमण करने लगे | began attacking |
| कपि | वानर | the monkeys |
| पुनि | फिर | again |
| चहूँ | चारों | all four |
| दुआरा | द्वारों पर | at the gates |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.49
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 820
- सहायक विषय
- माल्यवान्का रावणको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 819, 820
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।