लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि प्रभु बचन लाज हम मरहीं। मसक कहूँ खगपति हित करहीं।।
मूल पाठ
सुनि प्रभु बचन लाज हम मरहीं। मसक कहूँ खगपति हित करहीं।।
देखि राम रुख बानर रीछा। प्रेम मगन नहिं गृह कै ईछा।।
स्रोत अभिलेख 6.118 · पुस्तक पृ. 898, 899
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभुके (ऐसे) वचन सुनकर हम लाजके मारे मरे जा रहे हैं। कहीं मच्छर भी गरुड़का हित कर सकते हैं? श्रीरामजीका रुख देखकर रीछ-वानर प्रेममें मग्र हो गये। उनकी घर जानेकी इच्छा नहीं है॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 899 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि प्रभु बचन लाज हम मरहीं। मसक कहूँ खगपति हित करहीं।।
English explanation
Lord, hearing your words, we feel we could die of shame. Could mosquitoes ever benefit Garuda, lord of birds?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | hearing |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| बचन | आपके वचन | your words |
| लाज | लज्जा से | of shame |
| हम | हम | we |
| मरहीं | मरे जाते हैं | feel we could die |
| मसक | मच्छर | mosquitoes |
| कहूँ | भला कहीं | ever, possibly |
| खगपति | पक्षिराज गरुड़ का | Garuda, lord of birds |
| हित | हित | benefit |
| करहीं | कर सकते हैं | could do |
2 देखि राम रुख बानर रीछा। प्रेम मगन नहिं गृह कै ईछा।।
English explanation
Seeing Rama’s disposition, the monkeys and bears were absorbed in love and had no desire to go home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखि | देखकर | seeing |
| राम | श्रीराम का | Rama’s |
| रुख | रुख या मनोभाव | disposition or attitude |
| बानर | वानर | monkeys |
| रीछा | भालू | bears |
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| मगन | मग्न | absorbed |
| नहिं | नहीं | no |
| गृह | घर जाने | going home |
| कै | की | of |
| ईछा | इच्छा | desire |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 899
- सहायक विषय
- विभीषणका वस्त्राभूषण बरसाना और वानर-भालुओंका उन्हें पहनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 898, 899
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।