लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु जोइ कहहु तुम्हहि सब सोहा। हमरे होत बचन सुनि मोहा।।
मूल पाठ
प्रभु जोइ कहहु तुम्हहि सब सोहा। हमरे होत बचन सुनि मोहा।।
दीन जानि कपि किए सनाथा। तुम्ह त्रेलोक ईस रघुनाथा।।
स्रोत अभिलेख 6.118 · पुस्तक पृ. 898, 899
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभो! आप जो कुछ भी कहें, आपको सब सोहता है। पर आपके वचन सुनकर हमको मोह होता है। हे रघुनाथजी! आप तीनों लोकोंके ईश्वर हैं। हम वानरोंको दीन जानकर ही आपने सनाथ (कृतार्थ) किया है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 898 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 प्रभु जोइ कहहु तुम्हहि सब सोहा। हमरे होत बचन सुनि मोहा।।
English explanation
Lord, whatever you say befits you; yet hearing your words leaves us bewildered and distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| जोइ | जो भी | whatever |
| कहहु | आप कहते हैं | you say |
| तुम्हहि | आपको ही | you indeed |
| सब | सब | all |
| सोहा | शोभा देता है | befits |
| हमरे | हमें | in us |
| होत | होता है | arises |
| बचन | वचन | your words |
| सुनि | सुनकर | on hearing |
| मोहा | मोह या व्याकुलता | bewilderment or distress |
2 दीन जानि कपि किए सनाथा। तुम्ह त्रेलोक ईस रघुनाथा।।
English explanation
Recognizing us monkeys as helpless, you gave us a protector. O Rama, you are lord of the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दीन | दीन और असहाय | humble and helpless |
| जानि | जानकर | recognizing as |
| कपि | वानरों को | the monkeys |
| किए | बनाया | made |
| सनाथा | संरक्षक से युक्त | provided with a protector |
| तुम्ह | आप | you |
| त्रेलोक | तीनों लोकों के | of the three worlds |
| ईस | स्वामी | lord |
| रघुनाथा | हे रघुनाथ श्रीराम | O Rama, lord of Raghu’s lineage |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 898
- सहायक विषय
- विभीषणका वस्त्राभूषण बरसाना और वानर-भालुओंका उन्हें पहनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 898, 899
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।