लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज निज गृह अब तुम्ह सब जाहू। सुमिरेहु मोहि डरपहु जनि काहू।।
मूल पाठ
निज निज गृह अब तुम्ह सब जाहू। सुमिरेहु मोहि डरपहु जनि काहू।।
सुनत बचन प्रेमाकुल बानर। जोरि पानि बोले सब सादर।।
स्रोत अभिलेख 6.118 · पुस्तक पृ. 898, 899
भावार्थ
मूल पाठ के बादअब तुम सब अपने-अपने घर जाओ। मेरा स्मरण करते रहना और किसीसे डरना नहीं। ये वचन सुनते ही सब वानर प्रेममें विह्वल होकर हाथ जोड़कर आदरपूर्वक बोले—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 898 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 निज निज गृह अब तुम्ह सब जाहू। सुमिरेहु मोहि डरपहु जनि काहू।।
English explanation
Now all of you go to your respective homes. Remember me and fear no one.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | one’s own |
| निज | अपने | each one’s own |
| गृह | घर | homes |
| अब | अब | now |
| तुम्ह | तुम | you |
| सब | सब | all |
| जाहू | जाओ | go |
| सुमिरेहु | स्मरण करना | remember |
| मोहि | मुझे | me |
| डरपहु | डरो | fear |
| जनि | मत | do not |
| काहू | किसी से | anyone |
2 सुनत बचन प्रेमाकुल बानर। जोरि पानि बोले सब सादर।।
English explanation
Hearing these words, all the monkeys, overwhelmed with love, joined their hands and spoke respectfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| बचन | वचन | the words |
| प्रेमाकुल | प्रेम से व्याकुल | overwhelmed with love |
| बानर | वानर | monkeys |
| जोरि | जोड़कर | joining |
| पानि | हाथ | hands |
| बोले | बोले | spoke |
| सब | सभी | all |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 898
- सहायक विषय
- विभीषणका वस्त्राभूषण बरसाना और वानर-भालुओंका उन्हें पहनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 898, 899
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।