लङ्काकाण्ड · दोहा 118 (क) · दोहा
प्रभु प्रेरित कपि भालु सब राम रूप उर राखि।
प्रभु प्रेरित कपि भालु सब राम रूप उर राखि।
हरष बिषाद सहित चले बिनय बिबिध बिधि भाषि॥ ११८ (क)॥
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 6.118 · पुस्तक पृ. 898, 899
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1प्रभु प्रेरित कपि भालु सब राम रूप उर राखि।
एआई प्रारूप: प्रभु की प्रेरणा से सभी वानर और भालू राम का रूप हृदय में रखकर चले।
English explanation
AI draft: Prompted by the Lord, all the monkeys and bears departed, keeping Rama’s form in their hearts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम द्वारा | by Lord Rama |
| प्रेरित | प्रेरणा दिए गए | prompted |
| कपि | वानर | monkeys |
| भालु | भालू | bears |
| सब | सभी | all |
| राम | राम का | Rama’s |
| रूप | स्वरूप | form |
| उर | हृदय में | in their hearts |
| राखि | रखकर | having kept |
2हरष बिषाद सहित चले बिनय बिबिध बिधि भाषि॥ ११८ (क)॥
वे हर्ष और विषाद के साथ, अनेक प्रकार से विनय के वचन कहकर चले।
English explanation
They departed with both joy and sorrow, speaking humble words in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरष | हर्ष | joy |
| बिषाद | विषाद | sorrow |
| सहित | से युक्त | accompanied by |
| चले | वे चले | they departed |
| बिनय | विनम्र निवेदन | humble entreaties |
| बिबिध | अनेक | various |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| भाषि | कहकर | having spoken |
| क | पद-संदर्भ का चिह्न (क) | verse reference marker (a) |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- दोहा 118 (क)
- स्रोत अभिलेख
- 6.118
- सहायक विषय
- विभीषणका वस्त्राभूषण बरसाना और वानर-भालुओंका उन्हें पहनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 898, 899
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।