लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत बचन उठि बैठ कृपाला। गई गगन सो सकति कराला।।
मूल पाठ
सुनत बचन उठि बैठ कृपाला। गई गगन सो सकति कराला।।
पुनि कोदंड बान गहि धाए। रिपु सन्मुख अति आतुर आए।।
स्रोत अभिलेख 6.84 · पुस्तक पृ. 855, 856
भावार्थ
मूल पाठ के बादये वचन सुनते ही कृपालु लक्ष्मणजी उठ बैठे। वह कराल शक्ति आकाशको चली गयी। लक्ष्मणजी फिर धनुष-बाण लेकर दौड़े और बड़ी शीघ्रतासे शत्रुके सामने आ पहुँचे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 856 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनत बचन उठि बैठ कृपाला। गई गगन सो सकति कराला।।
English explanation
On hearing these words, the gracious Lakshmana sat up. That terrible shakti weapon departed into the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| बचन | वचन | words |
| उठि | उठकर | rising |
| बैठ | बैठ गए | sat up |
| कृपाला | कृपालु लक्ष्मण | the gracious Lakshmana |
| गई | चली गई | departed |
| गगन | आकाश में | into the sky |
| सो | वह | that |
| सकति | शक्ति-अस्त्र | shakti spear-weapon |
| कराला | भयानक | terrible |
2 पुनि कोदंड बान गहि धाए। रिपु सन्मुख अति आतुर आए।।
English explanation
Then Lakshmana took up his bow and arrows and rushed forward, coming before the enemy with great eagerness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पुनि | फिर | then |
| कोदंड | धनुष | bow |
| बान | बाण | arrows |
| गहि | पकड़कर | taking up |
| धाए | दौड़े | rushed forward |
| रिपु | शत्रु के | the enemy |
| सन्मुख | सामने | in front of |
| अति | अत्यंत | very |
| आतुर | उत्सुक; व्यग्र | eager; impatient |
| आए | आए | came |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.84
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 856
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 855, 856
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।