लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस कहि लछिमन कहुँ कपि ल्यायो। देखि दसानन बिसमय पायो।।
मूल पाठ
अस कहि लछिमन कहुँ कपि ल्यायो। देखि दसानन बिसमय पायो।।
कह रघुबीर समुझु जियँ भ्राता। तुम्ह कृतांत भच्छक सुर त्राता।।
स्रोत अभिलेख 6.84 · पुस्तक पृ. 855, 856
भावार्थ
मूल पाठ के बादऐसा कहकर और लक्ष्मणजीको उठाकर हनुमान्जी श्रीरघुनाथजीके पास ले आये। यह देखकर रावणको आश्चर्य हुआ। श्रीरघुवीरने [लक्ष्मणजीसे] कहा—हे भाई! हृदयमें समझो, तुम कालके भी भक्षक और देवताओंके रक्षक हो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 856 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अस कहि लछिमन कहुँ कपि ल्यायो। देखि दसानन बिसमय पायो।।
English explanation
Saying this, Hanuman brought Lakshmana back. Seeing this, Ravana was astonished.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| कहुँ | को | object marker |
| कपि | हनुमान | Hanuman |
| ल्यायो | ले आए | brought back |
| देखि | देखकर | seeing this |
| दसानन | दस मुखों वाला रावण | Ravana, the ten-headed king |
| बिसमय | आश्चर्य | astonishment |
| पायो | अनुभव किया | experienced |
2 कह रघुबीर समुझु जियँ भ्राता। तुम्ह कृतांत भच्छक सुर त्राता।।
English explanation
Rama said: Brother, recognize in your heart that you are the devourer of Death and the protector of the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहा | said |
| रघुबीर | रघुवंश के वीर राम ने | Rama, the hero of Raghu’s lineage |
| समुझु | समझो; पहचानो | understand; recognize |
| जियँ | हृदय में | in your heart |
| भ्राता | हे भाई | O brother |
| तुम्ह | तुम | you |
| कृतांत | मृत्यु के; यम के | of Death, or Yama |
| भच्छक | भक्षक | devourer |
| सुर | देवताओं के | of the gods |
| त्राता | रक्षक | protector |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.84
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 856
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 855, 856
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।