लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मुरुछा गै बहोरि सो जागा। कपि बल बिपुल सराहन लागा।।
मूल पाठ
मुरुछा गै बहोरि सो जागा। कपि बल बिपुल सराहन लागा।।
धिग धिग मम पौरुष धिग मोही। जौं तैं जिअत रहेसि सुरद्रोही।।
स्रोत अभिलेख 6.84 · पुस्तक पृ. 855, 856
भावार्थ
मूल पाठ के बादमूच्र्छा भंग होनेपर फिर वह जगा और हनुमान्जीके बड़े भारी बलको सराहने लगा। [हनुमान्जीने कहा—] मेरे पौरुषको धिक्कार है, धिक्कार है और मुझे भी धिक्कार है,जो हे देवद्रोही! तू अब भी जीता रह गया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 855 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मुरुछा गै बहोरि सो जागा। कपि बल बिपुल सराहन लागा।।
English explanation
His swoon passed, and he regained consciousness. He began praising Hanuman’s immense strength.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुरुछा | मूर्छा | unconsciousness |
| गै | चली गई | passed away |
| बहोरि | फिर | again |
| सो | वह रावण | he, Ravana |
| जागा | होश में आया | regained consciousness |
| कपि | हनुमान के | Hanuman’s |
| बल | बल की | strength |
| बिपुल | अपार | immense |
| सराहन | सराहना करने | to praise |
| लागा | लगा | began |
2 धिग धिग मम पौरुष धिग मोही। जौं तैं जिअत रहेसि सुरद्रोही।।
English explanation
Hanuman said: Shame, shame upon my prowess, and shame upon me, since you remain alive, enemy of the gods!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धिग | धिक्कार है | shame upon |
| धिग | धिक्कार है | shame upon |
| मम | मेरे | my |
| पौरुष | पराक्रम को | prowess |
| धिग | धिक्कार है | shame upon |
| मोही | मुझे | me |
| जौं | जो; क्योंकि | since |
| तैं | तू | you |
| जिअत | जीवित | alive |
| रहेसि | रह गया | have remained |
| सुरद्रोही | हे देवताओं के शत्रु | O enemy of the gods |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.84
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 855
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 855, 856
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।