लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानु टेकि कपि भूमि न गिरा। उठा सँभारि बहुत रिस भरा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहनुमान्जी घुटने टेककर रह गये, पृथ्वीपर गिरे नहीं। और फिर क्रोधसे भरे हुए सँभालकर उठे। हनुमान्जीने रावणको एक घूँसा मारा। वह ऐसा गिर पड़ा जैसे वज्रकी मारसे पर्वत गिरा हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 855 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जानु टेकि कपि भूमि न गिरा। उठा सँभारि बहुत रिस भरा।।
मुठिका एक ताहि कपि मारा। परेउ सैल जनु बज्र प्रहारा।।
स्रोत अभिलेख 6.84 · पुस्तक पृ. 855, 856
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जानु टेकि कपि भूमि न गिरा। उठा सँभारि बहुत रिस भरा।।
English explanation
AI draft meaning: Hanuman steadied himself on a knee and did not fall to the ground. He rose, gathering himself, filled with great anger.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानु | घुटना | knee |
| टेकि | टेककर | placing down for support |
| कपि | वानर हनुमान | Hanuman, the monkey warrior |
| भूमि | भूमि पर | to the ground |
| न | नहीं | not |
| गिरा | गिरे | fell |
| उठा | उठे | rose |
| सँभारि | अपने को सँभालकर | gathering himself |
| बहुत | बहुत | greatly |
| रिस | क्रोध से | with anger |
| भरा | भरे हुए | filled |
2 मुठिका एक ताहि कपि मारा। परेउ सैल जनु बज्र प्रहारा।।
English explanation
Hanuman struck him with a single punch. He fell like a mountain struck by a thunderbolt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुठिका | मुक्का | punch |
| एक | एक | one |
| ताहि | उसे, रावण को | him, Ravana |
| कपि | हनुमान ने | Hanuman |
| मारा | मारा | struck |
| परेउ | गिर पड़ा | fell down |
| सैल | पर्वत | mountain |
| जनु | मानो | as though |
| बज्र | वज्र के | of a thunderbolt |
| प्रहारा | प्रहार से | from a blow |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.84
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 855
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 855, 856
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।