लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेंहि बूझा। करब कवन बिधि रिपु सैं जूझा।।
मूल पाठ
सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेंहि बूझा। करब कवन बिधि रिपु सैं जूझा।।
कहहिं सचिव सुनु निसिचर नाहा। बार बार प्रभु पूछहु काहा।।
स्रोत अभिलेख 6.8 · पुस्तक पृ. 779, 779
भावार्थ
मूल पाठ के बादसभामें आकर उसने मन्त्रियोंसे पूछा कि शत्रुके साथ किस प्रकारसे युद्ध करना होगा? मन्त्री कहने लगे—हे राक्षसोंके नाथ! हे प्रभु! सुनिये, आप बार-बार क्या पूछते हैं?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 779 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सभाँ आइ मंत्रिन्ह तेंहि बूझा। करब कवन बिधि रिपु सैं जूझा।।
English explanation
Coming into the assembly, Ravana asked the ministers, ‘How shall we fight the enemy?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सभाँ | सभा में | into the assembly |
| आइ | आकर | having come |
| मंत्रिन्ह | मंत्रियों से | the ministers |
| तेंहि | उसने, रावण ने | he, Ravana |
| बूझा | पूछा | asked |
| करब | करेंगे | shall we undertake |
| कवन | किस | what |
| बिधि | प्रकार से | in manner |
| रिपु | शत्रु | the enemy |
| सैं | से | against |
| जूझा | युद्ध | combat |
2 कहहिं सचिव सुनु निसिचर नाहा। बार बार प्रभु पूछहु काहा।।
English explanation
The ministers say, ‘Listen, lord of the demons! Master, why do you keep asking?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहिं | कहते हैं | say |
| सचिव | मंत्री | the ministers |
| सुनु | सुनिए | listen |
| निसिचर | राक्षसों के | of the demons |
| नाहा | हे स्वामी | O lord |
| बार | बार | time |
| बार | बार, पुनः | after time, again |
| प्रभु | हे प्रभु | O master |
| पूछहु | आप पूछते हैं | you ask |
| काहा | क्यों | why |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 779
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 779, 779
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।