लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहु कवन भय करिअ बिचारा। नर कपि भालु अहार हमारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकहिये तो [ऐसा] कौन-सा बड़ा भय है, जिसका विचार किया जाय? (भयकी बात ही क्या है?) मनुष्य और वानर-भालू तो हमारे भोजन [की सामग्री] हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 779 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहहु कवन भय करिअ बिचारा। नर कपि भालु अहार हमारा।।
स्रोत अभिलेख 6.8 · पुस्तक पृ. 779, 779
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहहु कवन भय करिअ बिचारा। नर कपि भालु अहार हमारा।।
English explanation
Tell us, what fear is there to consider? Humans, monkeys, and bears are our food.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | बताइए | tell us |
| कवन | किस | what |
| भय | भय का | fear |
| करिअ | किया जाए | should be given |
| बिचारा | विचार | consideration |
| नर | मनुष्य | humans |
| कपि | वानर | monkeys |
| भालु | भालू | bears |
| अहार | भोजन | food |
| हमारा | हमारा | our |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.8
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 779
- सहायक विषय
- रावणको मन्दोदरीका समझाना, रावण-प्रहस्त-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 779, 779
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।