लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सजल नयन कह जुग कर जोरी। सुनहु प्रानपति बिनती मोरी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दनेत्रोंमें जल भरकर, दोनों हाथ जोड़कर वह [रावणसे] कहने लगी—हे प्राणनाथ! मेरी विनती सुनिये। हे प्रियतम! श्रीरामसे विरोध छोड़ दीजिये। उन्हें मनुष्य जानकर मनमें हठ न पकड़े रहिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 785 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सजल नयन कह जुग कर जोरी। सुनहु प्रानपति बिनती मोरी।।
कंत राम बिरोध परिहरहू। जानि मनुज जनि हठ मन धरहू।।
स्रोत अभिलेख 6.14 · पुस्तक पृ. 785, 785
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सजल नयन कह जुग कर जोरी। सुनहु प्रानपति बिनती मोरी।।
English explanation
With tear-filled eyes and both hands joined, she says: Beloved husband, hear my plea.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सजल | आँसुओं से भरे | filled with tears |
| नयन | नेत्र | eyes |
| कह | कहती है | she says |
| जुग | दोनों; जोड़ी | both; a pair |
| कर | हाथ | hands |
| जोरी | जोड़कर | joining |
| सुनहु | सुनिए | please hear |
| प्रानपति | हे प्राणप्रिय पति | O husband, dear as life |
| बिनती | विनती | plea |
| मोरी | मेरी | my |
2 कंत राम बिरोध परिहरहू। जानि मनुज जनि हठ मन धरहू।।
English explanation
Husband, abandon your hostility toward Rama. Do not persist in stubbornness by considering him merely human.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कंत | हे पति | O husband |
| राम | राम से | toward Rama |
| बिरोध | विरोध; शत्रुता | hostility |
| परिहरहू | छोड़ दीजिए | abandon |
| जानि | समझकर | considering |
| मनुज | मनुष्य | a human being |
| जनि | मत | do not |
| हठ | जिद | stubbornness |
| मन | मन में | in your mind |
| धरहू | रखिए | hold |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 785
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 785, 785
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।