लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सयन करहु निज निज गृह जाई। गवने भवन सकल सिर नाई।।
मूल पाठ
सयन करहु निज निज गृह जाई। गवने भवन सकल सिर नाई।।
मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ।।
स्रोत अभिलेख 6.14 · पुस्तक पृ. 785, 785
भावार्थ
मूल पाठ के बादअपने-अपने घर जाकर सो रहो [डरनेकी कोई बात नहीं है] तब सब लोग सिर नवाकर घर गये। जबसे कर्णफूल पृथ्वीपर गिरा, तबसे मन्दोदरीके हृदयमें सोच बस गया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 785 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सयन करहु निज निज गृह जाई। गवने भवन सकल सिर नाई।।
English explanation
Go to your respective homes and sleep. All bowed their heads and departed for their homes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सयन | शयन; सोना | sleep |
| करहु | करो | do |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने; प्रत्येक के | respective |
| गृह | घर | homes |
| जाई | जाकर | having gone |
| गवने | चले गए | departed |
| भवन | घरों को | to their homes |
| सकल | सभी | all |
| सिर | सिर | heads |
| नाई | झुकाकर | bowing |
2 मंदोदरी सोच उर बसेऊ। जब ते श्रवनपूर महि खसेऊ।।
English explanation
Ever since her ear ornament had fallen to the ground, anxiety had settled in Mandodari's heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंदोदरी | रावण की पत्नी मंदोदरी | Mandodari, Ravana's wife |
| सोच | चिंता | anxiety |
| उर | हृदय में | in the heart |
| बसेऊ | बस गई | settled |
| जब | जब | when |
| ते | से | since |
| श्रवनपूर | कान का आभूषण | ear ornament |
| महि | धरती पर | onto the ground |
| खसेऊ | गिरा | fell |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.14
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 785
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 785, 785
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।