लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सगुनोपासक मोच्छ न लेहीं। तिन्ह कहुँ राम भगति निज देहीं।।
मूल पाठ
सगुनोपासक मोच्छ न लेहीं। तिन्ह कहुँ राम भगति निज देहीं।।
बार बार करि प्रभुहि प्रनामा। दसरथ हरषि गए सुरधामा।।
स्रोत अभिलेख 6.112 · पुस्तक पृ. 891, 892
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[मायारहित सच्चिदानन्दमय स्वरूपभूत दिव्यगुणयुक्त] सगुणस्वरूपकी उपासना करनेवाले भक्त इस प्रकारका मोक्ष लेते भी नहीं। उनको श्रीरामजी अपनी भक्ति देते हैं। प्रभुको [इष्टबुद्धिसे] बार- बार प्रणाम करके दशरथजी हर्षित होकर देवलोकको चले गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 892 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सगुनोपासक मोच्छ न लेहीं। तिन्ह कहुँ राम भगति निज देहीं।।
English explanation
Worshippers of the Lord with form and attributes do not accept liberation; Rama grants them devotion to himself.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सगुनोपासक | भगवान के सगुण रूप के उपासक | worshippers of God with form and attributes |
| मोच्छ | मोक्ष | liberation |
| न | नहीं | not |
| लेहीं | लेते हैं | accept |
| तिन्ह | उन उपासकों | those worshippers |
| कहुँ | को | to |
| राम | राम | Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| निज | अपनी, अपने प्रति | his own, directed toward himself |
| देहीं | देते हैं | grants |
2 बार बार करि प्रभुहि प्रनामा। दसरथ हरषि गए सुरधामा।।
English explanation
After repeatedly bowing to the Lord, Dasharatha joyfully departed for the abode of the gods.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार; बार-बार | after time; repeatedly |
| करि | करके | having offered |
| प्रभुहि | प्रभु राम को | to Lord Rama |
| प्रनामा | प्रणाम | obeisance |
| दसरथ | दशरथ | Dasharatha |
| हरषि | हर्षित होकर | joyfully |
| गए | चले गए | departed |
| सुरधामा | देवताओं के धाम को | to the abode of the gods |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 892
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 891, 892
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