लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रघुपति प्रथम प्रेम अनुमाना। चितइ पितहि दीन्हेउ दृढ़ ग्याना।।
मूल पाठ
रघुपति प्रथम प्रेम अनुमाना। चितइ पितहि दीन्हेउ दृढ़ ग्याना।।
ताते उमा मोच्छ नहिं पायो। दसरथ भेद भगति मन लायो।।
स्रोत अभिलेख 6.112 · पुस्तक पृ. 891, 892
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजीने पहलेके (जीवित कालके) प्रेमको विचारकर, पिताकी ओर देखकर ही उन्हें अपने स्वरूपका दृढ़ ज्ञान करा दिया। हे उमा! दशरथजीने भेद-भक्तिमें अपना मन लगाया था, इसीसे उन्होंने [कैवल्य] मोक्ष नहीं पाया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 892 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रघुपति प्रथम प्रेम अनुमाना। चितइ पितहि दीन्हेउ दृढ़ ग्याना।।
English explanation
Rama first recognized his father’s love; then, looking toward him, he imparted firm spiritual knowledge to him.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम ने | Rama, lord of the Raghu lineage |
| प्रथम | पहले | first |
| प्रेम | पिता का प्रेम | his father’s love |
| अनुमाना | समझा | recognized |
| चितइ | दृष्टि डालकर | looking toward him |
| पितहि | पिता को | to his father |
| दीन्हेउ | दिया | imparted |
| दृढ़ | दृढ़ | firm |
| ग्याना | आध्यात्मिक ज्ञान | spiritual knowledge |
2 ताते उमा मोच्छ नहिं पायो। दसरथ भेद भगति मन लायो।।
English explanation
O Uma, Dasharatha had devoted his mind to devotion retaining a distinction between devotee and Lord; for that reason he did not attain liberation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ताते | इसी कारण | for that reason |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| मोच्छ | मोक्ष | liberation |
| नहिं | नहीं | not |
| पायो | पाया | attained |
| दसरथ | दशरथ ने | Dasharatha |
| भेद | भक्त और भगवान की भिन्नता वाली | retaining the distinction between devotee and Lord |
| भगति | भक्ति में | in devotion |
| मन | मन | his mind |
| लायो | लगाया | directed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 892
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 891, 892
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।