लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात सकल तव पुन्य प्रभाऊ। जीत्यों अजय निसाचर राऊ।।
मूल पाठ
तात सकल तव पुन्य प्रभाऊ। जीत्यों अजय निसाचर राऊ।।
सुनि सुत बचन प्रीति अति बाढ़ी। नयन सलिल रोमावलि ठाढ़ी।।
स्रोत अभिलेख 6.112 · पुस्तक पृ. 891, 892
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[श्रीरामजीने कहा—] हे तात! यह सब आपके पुण्योंका प्रभाव है, जो मैंने अजेय राक्षसराजको जीत लिया। पुत्रके वचन सुनकर उनकी प्रीति अत्यन्त बढ़ गयी। नेत्रोंमें जल छा गया और रोमावली खड़ी हो गयी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 892 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तात सकल तव पुन्य प्रभाऊ। जीत्यों अजय निसाचर राऊ।।
English explanation
Rama said: Father, it is all through the power of your merit that I defeated the unconquerable king of the demons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | हे पिताजी | O father |
| सकल | सब | all |
| तव | आपके | your |
| पुन्य | पुण्य का | of accumulated merit |
| प्रभाऊ | प्रभाव | power |
| जीत्यों | मैंने जीत लिया | I defeated |
| अजय | अजेय | unconquerable |
| निसाचर | राक्षसों का | of the demons |
| राऊ | राजा रावण | king Ravana |
2 सुनि सुत बचन प्रीति अति बाढ़ी। नयन सलिल रोमावलि ठाढ़ी।।
English explanation
Hearing his son’s words, Dasharatha’s love grew greatly. Tears filled his eyes, and the hairs on his body stood on end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सुत | पुत्र के | his son’s |
| बचन | वचन | words |
| प्रीति | प्रेम | love |
| अति | बहुत | greatly |
| बाढ़ी | बढ़ गया | increased |
| नयन | नेत्रों में | in his eyes |
| सलिल | आँसू | tears |
| रोमावलि | शरीर के रोम | the hairs on his body |
| ठाढ़ी | खड़े हो गए | stood on end |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.112
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 892
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 891, 892
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।