लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रोम राजि अष्टादस भारा। अस्थि सैल सरिता नस जारा।।
मूल पाठ
रोम राजि अष्टादस भारा। अस्थि सैल सरिता नस जारा।।
उदर उदधि अधगो जातना। जगमय प्रभु का बहु कलपना।।
स्रोत अभिलेख 6.15 · पुस्तक पृ. 785, 786
भावार्थ
मूल पाठ के बादअठारह प्रकारकी असंख्य वनस्पतियाँ जिनकी रोमावली हैं, पर्वत अस्थियाँ हैं, नदियाँ नसोंका जाल हैं, समुद्र पेट है और नरक जिनकी नीचेकी इन्द्रियाँ हैं। इस प्रकार प्रभु विश्वमय हैं, अधिक कल्पना (ऊहापोह) क्या की जाय?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 786 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 रोम राजि अष्टादस भारा। अस्थि सैल सरिता नस जारा।।
English explanation
The eighteen loads of vegetation are the rows of his body hair; mountains are his bones, and rivers the network of his veins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रोम | शरीर के रोएँ | body hair |
| राजि | पंक्ति; समूह | rows; array |
| अष्टादस | अठारह | eighteen |
| भारा | भार; यहाँ वनस्पति के समूह | loads; here, masses of vegetation |
| अस्थि | हड्डियाँ | bones |
| सैल | पर्वत | mountains |
| सरिता | नदियाँ | rivers |
| नस | नसें | veins |
| जारा | जाल | network |
2 उदर उदधि अधगो जातना। जगमय प्रभु का बहु कलपना।।
English explanation
The ocean is his belly, and torment constitutes his lower organs. The Lord encompasses the world—what need is there for further elaboration?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उदर | पेट | belly |
| उदधि | समुद्र | ocean |
| अधगो | अधोभाग की इंद्रियाँ | lower organs |
| जातना | यातना; पीड़ा | torment; suffering |
| जगमय | समस्त जगत में व्याप्त | encompassing the whole world |
| प्रभु | प्रभु | the Lord |
| का | क्या; क्या आवश्यकता है | what; what need is there |
| बहु | बहुत; अधिक | much; further |
| कलपना | कल्पना; वर्णन का विस्तार | conception; elaboration |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 786
- सहायक विषय
- मन्दोदरीका फिर रावणको समझाना और श्रीरामकी महिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 785, 786
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।