लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम सरिस को दीन हितकारी। कीन्हे मुकुत निसाचर झारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामचन्द्रजीके समान दीनोंका हित करनेवाला कौन है? जिन्होंने सारे राक्षसोंको मुक्त कर दिया! दुष्ट, पापोंके घर और कामी रावणने भी वह गति पायी जिसे श्रेष्ठ मुनि भी नहीं पाते॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 894 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
राम सरिस को दीन हितकारी। कीन्हे मुकुत निसाचर झारी।।
खल मल धाम काम रत रावन। गति पाई जो मुनिबर पाव न।।
स्रोत अभिलेख 6.114 · पुस्तक पृ. 894, 894
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम सरिस को दीन हितकारी। कीन्हे मुकुत निसाचर झारी।।
English explanation
Who benefits the helpless as Rama does? He liberated all the demons.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम | Lord Rama |
| सरिस | के समान | like |
| को | कौन | who |
| दीन | दीनों का | of the helpless |
| हितकारी | हित करने वाला | benefactor |
| कीन्हे | कर दिया | made |
| मुकुत | मुक्त | liberated |
| निसाचर | राक्षसों को | the demons |
| झारी | सभी | all |
2 खल मल धाम काम रत रावन। गति पाई जो मुनिबर पाव न।।
English explanation
Ravana, wicked, an abode of impurity, and engrossed in lust, attained the final spiritual state that even eminent sages do not attain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| खल | दुष्ट | wicked |
| मल | पाप और अशुद्धि का | of sin and impurity |
| धाम | घर; आश्रय | abode |
| काम | कामवासना में | in lust |
| रत | लिप्त | engrossed |
| रावन | राक्षसराज रावण | Ravana, the demon king |
| गति | परम गति; मुक्ति | final spiritual state; liberation |
| पाई | प्राप्त की | attained |
| जो | जो | which |
| मुनिबर | श्रेष्ठ मुनि | eminent sages |
| पाव | प्राप्त करते हैं | attain |
| न | नहीं | not |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.114
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 894
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 894, 894
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