लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रन ते निलज भाजि गृह आवा। इहाँ आइ बक ध्यान लगावा।।
मूल पाठ
रन ते निलज भाजि गृह आवा। इहाँ आइ बक ध्यान लगावा।।
अस कहि अंगद मारा लाता। चितव न सठ स्वारथ मन राता।।
स्रोत अभिलेख 6.85 · पुस्तक पृ. 856, 857
भावार्थ
मूल पाठ के बाद[उन्होंने कहा—] अरे ओ निर्लज्ज! रणभूमिसे घर भाग आया और यहाँ आकर बगुलेका- सा ध्यान लगाकर बैठा है? ऐसा कहकर अंगदने लात मारी। पर उसने इनकी ओर देखा भी नहीं, उस दुष्टका मन स्वार्थमें अनुरक्त था॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 857 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रन ते निलज भाजि गृह आवा। इहाँ आइ बक ध्यान लगावा।।
English explanation
This shameless fellow fled the battle and came home; now he sits here in a crane-like show of meditation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रन | युद्ध | battle |
| ते | से | from |
| निलज | निर्लज्ज | shameless fellow |
| भाजि | भागकर | having fled |
| गृह | घर | home |
| आवा | आया | came |
| इहाँ | यहाँ | here |
| आइ | आकर | having come |
| बक | बगुले जैसा कपटपूर्ण | crane-like, hypocritical |
| ध्यान | ध्यान | meditation |
| लगावा | लगाया | assumed |
2 अस कहि अंगद मारा लाता। चितव न सठ स्वारथ मन राता।।
English explanation
Saying this, Angada kicked him. But the wicked fellow did not even look up, his mind absorbed in his own interest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | this |
| कहि | कहकर | having said |
| अंगद | अंगद ने, बालि के पुत्र ने | Angada, Bali’s son |
| मारा | मारी | delivered |
| लाता | लात | a kick |
| चितव | देखता है | looks up |
| न | नहीं | not |
| सठ | दुष्ट रावण | the wicked Ravana |
| स्वारथ | अपने स्वार्थ में | in his own interest |
| मन | मन | mind |
| राता | डूबा हुआ | absorbed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.85
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 857
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 856, 857
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।