लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कौतुक कूदि चढ़े कपि लंका। पैठे रावन भवन असंका।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दवानर खेलसे ही कूदकर लंकापर जा चढ़े और निर्भय रावणके महलमें जा घुसे। ज्यों ही उसको यज्ञ करते देखा, त्यों ही सब वानरोंको बहुत क्रोध हुआ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 857 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कौतुक कूदि चढ़े कपि लंका। पैठे रावन भवन असंका।।
जग्य करत जबहीं सो देखा। सकल कपिन्ह भा क्रोध बिसेषा।।
स्रोत अभिलेख 6.85 · पुस्तक पृ. 856, 857
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कौतुक कूदि चढ़े कपि लंका। पैठे रावन भवन असंका।।
English explanation
The monkeys playfully leaped up into Lanka and entered Ravana’s palace without fear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कौतुक | खेल-खेल में | playfully |
| कूदि | कूदकर | leaping |
| चढ़े | चढ़ गए | climbed up into |
| कपि | वानर | the monkeys |
| लंका | लंका नगरी | the city of Lanka |
| पैठे | घुस गए | entered |
| रावन | रावण का | Ravana’s |
| भवन | महल | palace |
| असंका | बिना भय या संकोच के | without fear or hesitation |
2 जग्य करत जबहीं सो देखा। सकल कपिन्ह भा क्रोध बिसेषा।।
English explanation
As soon as they saw him performing the sacrifice, all the monkeys became intensely angry.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जग्य | यज्ञ | the sacrifice |
| करत | करते हुए | performing |
| जबहीं | ज्यों ही | as soon as |
| सो | उसे, रावण को | him, Ravana |
| देखा | देखा | saw |
| सकल | सभी | all |
| कपिन्ह | वानरों को | the monkeys |
| भा | हुआ | arose |
| क्रोध | क्रोध | anger |
| बिसेषा | बहुत अधिक | intense |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.85
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 857
- सहायक विषय
- रावण-मूर्च्छा, रावण-यज्ञ-विध्वंस, राम-रावण-युद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 856, 857
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।