लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
रघुपति बिरह सबिष सर भारी। तकि तकि मार बार बहु मारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजो श्रीरघुनाथजीके विरहरूपी बड़े विषैले बाणोंसे तक-तककर मुझे बहुत बार मारकर, अब भी मार रहा है और ऐसे दु:खमें भी जो मेरे प्राणोंको रख रहा है, वही विधाता उस (रावण) को जिला रहा है, दूसरा कोई नहीं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 874 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
रघुपति बिरह सबिष सर भारी। तकि तकि मार बार बहु मारी।।
ऐसेहुँ दुख जो राख मम प्राना। सोइ बिधि ताहि जिआव न आना।।
स्रोत अभिलेख 6.99 · पुस्तक पृ. 873, 874
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 रघुपति बिरह सबिष सर भारी। तकि तकि मार बार बहु मारी।।
English explanation
It repeatedly took aim and struck me with powerful, poisoned arrows of separation from Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | राम से | from Rama |
| बिरह | वियोग | separation |
| सबिष | विषयुक्त | poisoned |
| सर | बाण | arrows |
| भारी | प्रबल; भारी | powerful; heavy |
| तकि | निशाना साधकर | taking aim |
| तकि | बार-बार निशाना साधकर | taking aim again |
| मार | प्रहार; चोट | blows; strikes |
| बार | बार | times |
| बहु | बहुत | many |
| मारी | मारे; पहुँचाए | dealt; inflicted |
2 ऐसेहुँ दुख जो राख मम प्राना। सोइ बिधि ताहि जिआव न आना।।
English explanation
The same Providence that preserves my life even amid such suffering keeps Ravana alive; it is no other.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऐसेहुँ | ऐसे भी; इतने भी | even such |
| दुख | दुःख में | amid suffering |
| जो | जो | which |
| राख | बचाए रखता है | preserves |
| मम | मेरे | my |
| प्राना | प्राण | life |
| सोइ | वही | that very same |
| बिधि | विधाता | Providence |
| ताहि | उस रावण को | that Ravana |
| जिआव | जीवित रखता है | keeps alive |
| न | नहीं | not |
| आना | कोई दूसरा | any other |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 874
- सहायक विषय
- त्रिजटा-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 873, 874
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