लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा। अजहुँ सो दैव मोहि पर रूठा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजिसने कपटका झूठा स्वर्णमृग बनाया था, वही दैव अब भी मुझपर रूठा हुआ है। जिस विधाताने मुझसे दु:सह दु:ख सहन कराये और लक्ष्मणको कड़ुवे वचन कहलाये,॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 874 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा। अजहुँ सो दैव मोहि पर रूठा।।
जेहिं बिधि मोहि दुख दुसह सहाए। लछिमन कहुँ कटु बचन कहाए।।
स्रोत अभिलेख 6.99 · पुस्तक पृ. 873, 874
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जेहिं कृत कपट कनक मृग झूठा। अजहुँ सो दैव मोहि पर रूठा।।
English explanation
The fate that fashioned the deceptive, unreal golden deer is still hostile to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिसने | which |
| कृत | बनाया; रचा | made; fashioned |
| कपट | छल से | deceptively |
| कनक | सोने का | golden |
| मृग | हिरन | deer |
| झूठा | झूठा; मायामय | false; illusory |
| अजहुँ | अब भी | even now |
| सो | वही | that same |
| दैव | दैव; भाग्य | fate |
| मोहि | मुझ | me |
| पर | पर | toward; against |
| रूठा | रूठा हुआ | displeased; hostile |
2 जेहिं बिधि मोहि दुख दुसह सहाए। लछिमन कहुँ कटु बचन कहाए।।
English explanation
The Providence that made me endure unbearable suffering and made me speak harsh words to Lakshmana—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिस | which |
| बिधि | विधाता ने | Providence |
| मोहि | मुझसे | made me |
| दुख | दुःख | suffering |
| दुसह | असहनीय | unbearable |
| सहाए | सहवाए | caused to endure |
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के छोटे भाई | Lakshmana, Rama’s younger brother |
| कहुँ | को; से | to |
| कटु | कठोर | harsh |
| बचन | वचन | words |
| कहाए | कहलवाए | caused to speak |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 874
- सहायक विषय
- त्रिजटा-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 873, 874
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।