लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बहु बिधि कर बिलाप जानकी। करि करि सुरति कृपानिधान की।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकृपानिधान श्रीरामजीकी याद कर-करके जानकीजी बहुत प्रकारसे विलाप कर रही हैं। त्रिजटाने कहा—हे राजकुमारी! सुनो, देवताओंका शत्रु रावण हृदयमें बाण लगते ही मर जायगा॥ ६॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 874 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
बहु बिधि कर बिलाप जानकी। करि करि सुरति कृपानिधान की।।
कह त्रिजटा सुनु राजकुमारी। उर सर लागत मरइ सुरारी।।
स्रोत अभिलेख 6.99 · पुस्तक पृ. 873, 874
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बहु बिधि कर बिलाप जानकी। करि करि सुरति कृपानिधान की।।
English explanation
Remembering Rama, the abode of compassion, again and again, Janaki laments in many ways.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहु | अनेक | many |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| कर | करती हैं | does; makes |
| बिलाप | विलाप | lamentation |
| जानकी | जनक की पुत्री सीता | Sita, daughter of Janaka |
| करि | करके | doing |
| करि | बार-बार करके | doing repeatedly |
| सुरति | स्मरण | remembrance |
| कृपानिधान | कृपा के भंडार राम | Rama, the abode of compassion |
| की | का | of |
2 कह त्रिजटा सुनु राजकुमारी। उर सर लागत मरइ सुरारी।।
English explanation
Trijata says, ‘Listen, princess! Ravana, the enemy of the gods, will die when an arrow strikes his heart.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कह | कहती हैं | says |
| त्रिजटा | त्रिजटा | Trijata |
| सुनु | सुनो | listen |
| राजकुमारी | हे राजकुमारी सीता | O princess Sita |
| उर | हृदय में | in the heart |
| सर | बाण | an arrow |
| लागत | लगते ही | upon striking |
| मरइ | मर जाएगा | will die |
| सुरारी | देवताओं का शत्रु रावण | Ravana, enemy of the gods |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 874
- सहायक विषय
- त्रिजटा-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 873, 874
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