लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
प्रभु ताते उर हतइ न तेही। एहि के हृदयँ बसति बैदेही।।
मूल पाठ
प्रभु ताते उर हतइ न तेही। एहि के हृदयँ बसति बैदेही।।
स्रोत अभिलेख 6.99 · पुस्तक पृ. 873, 874
भावार्थ
मूल पाठ के बादपरन्तु प्रभु उसके हृदयमें बाण इसलिये नहीं मारते कि इसके हृदयमें जानकीजी (आप) बसती हैं॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 874 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 प्रभु ताते उर हतइ न तेही। एहि के हृदयँ बसति बैदेही।।
English explanation
Lord Rama therefore does not strike his heart, because Vaidehi, Sita, dwells in it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| ताते | इसलिए | for that reason |
| उर | हृदय पर | at the heart |
| हतइ | प्रहार करते हैं | strikes |
| न | नहीं | not |
| तेही | उस रावण के | of that Ravana |
| एहि | इस रावण | this Ravana |
| के | के | of; his |
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| बसति | बसती हैं | dwells |
| बैदेही | विदेह की राजकुमारी सीता | Sita, princess of Videha |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.99
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 874
- सहायक विषय
- त्रिजटा-सीता-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 873, 874
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