लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषअद पुनि पुनि सिर धुनेऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयह समाचार जब रावणने सुना, तब उसने अत्यन्त विषादसे बार-बार सिर पीटा। वह व्याकुल होकर कुम्भकर्णके पास गया और बहुत-से उपाय करके उसने उसको जगाया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 832 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषअद पुनि पुनि सिर धुनेऊ।।
ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा।।
स्रोत अभिलेख 6.62 · पुस्तक पृ. 831, 832
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषअद पुनि पुनि सिर धुनेऊ।।
English explanation
Ravana heard this account and, in deep grief, repeatedly beat his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यह | यह | this |
| बृत्तांत | वृत्तांत; समाचार | account; news |
| दसानन | दस मुखों वाले रावण ने | Ravana, the ten-headed king |
| सुनेऊ | सुना | heard |
| अति | अत्यंत | deep; extreme |
| बिषअद | विषाद; दुःख | grief; sorrow |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर; बार-बार | again; repeatedly |
| सिर | सिर | his head |
| धुनेऊ | धुना; दुःख से पीटा | beat in grief |
2 ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि जगावा।।
English explanation
Distraught, Ravana came to Kumbhakarna and awakened him through various efforts.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ब्याकुल | व्याकुल होकर | distraught |
| कुंभकरन | कुंभकर्ण, रावण के भाई | Kumbhakarna, Ravana’s brother |
| पहिं | के पास | to; near |
| आवा | आया | came |
| बिबिध | विविध; अनेक प्रकार के | various |
| जतन | प्रयत्न | efforts |
| करि | करके | making |
| ताहि | उसे; कुंभकर्ण को | him; Kumbhakarna |
| जगावा | जगाया | awakened |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.62
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 832
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 831, 832
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।