लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।।
मूल पाठ
हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।।
कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा।।
स्रोत अभिलेख 6.62 · पुस्तक पृ. 831, 832
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभु भाईको हृदयसे लगाकर मिले। भालू और वानरोंके समूह सब हॢषत हो गये। फिर हनुमान्जीने वैद्यको उसी प्रकार वहाँ पहुँचा दिया जिस प्रकार वे उस बार (पहले) उसे ले आये थे॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 831 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हृदयँ लाइ प्रभु भेंटेउ भ्राता। हरषे सकल भालु कपि ब्राता।।
English explanation
Lord Rama clasped his brother to his chest and embraced him. All the companies of bears and monkeys rejoiced.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हृदयँ | हृदय से; छाती से | to his chest |
| लाइ | लगाकर | clasping |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| भेंटेउ | गले लगाया | embraced |
| भ्राता | भाई लक्ष्मण को | his brother Lakshmana |
| हरषे | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| सकल | सभी | all |
| भालु | भालू | bears |
| कपि | वानर | monkeys |
| ब्राता | समूह | companies; groups |
2 कपि पुनि बैद तहाँ पहुँचावा। जेहि बिधि तबहिं ताहि लइ आवा।।
English explanation
Hanuman then returned the physician to his original place in the same manner in which he had brought him earlier.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कपि | वानर हनुमान ने | Hanuman, the monkey hero |
| पुनि | फिर | then; again |
| बैद | वैद्य को | the physician |
| तहाँ | वहाँ; उसके पहले स्थान पर | there; to his original place |
| पहुँचावा | पहुँचा दिया | conveyed back |
| जेहि | जिस | in which |
| बिधि | रीति से | manner |
| तबहिं | उस पहले समय | at that earlier time |
| ताहि | उसे; वैद्य को | him; the physician |
| लइ | लेकर | taking along |
| आवा | आए थे | had come |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.62
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 831
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 831, 832
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।