लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हरषि राम भेंटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजी हॢषत होकर हनुमान्जीसे गले लगकर मिले। प्रभु परम सुजान (चतुर) और अत्यन्त ही कृतज्ञ हैं। तब वैद्य (सुषेण) ने तुरंत उपाय किया, [जिससे] लक्ष्मणजी हॢषत होकर उठ बैठे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 831 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हरषि राम भेंटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।।
तुरत बैद तब कीन्ह उपाई। उठि बैठे लछिमन हरषाई।।
स्रोत अभिलेख 6.62 · पुस्तक पृ. 831, 832
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 हरषि राम भेंटेउ हनुमाना। अति कृतग्य प्रभु परम सुजाना।।
English explanation
AI draft: Rama joyfully embraced Hanuman. The Lord is deeply grateful and supremely discerning.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषि | प्रसन्न होकर | rejoicing |
| राम | राम ने | Rama |
| भेंटेउ | गले लगाया | embraced |
| हनुमाना | हनुमान को | Hanuman |
| अति | अत्यंत | deeply |
| कृतग्य | कृतज्ञ; उपकार मानने वाले | grateful; appreciative of help |
| प्रभु | प्रभु राम | the Lord Rama |
| परम | परम; अत्यंत | supremely |
| सुजाना | विवेकशील; भलीभाँति समझने वाले | discerning; understanding |
2 तुरत बैद तब कीन्ह उपाई। उठि बैठे लछिमन हरषाई।।
English explanation
The physician then promptly administered treatment, and Lakshmana joyfully sat up.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुरत | तुरंत | immediately |
| बैद | वैद्य ने | the physician |
| तब | तब | then |
| कीन्ह | किया | performed |
| उपाई | उपाय; चिकित्सा | remedial treatment |
| उठि | उठकर | rising |
| बैठे | बैठ गए | sat up |
| लछिमन | लक्ष्मण, राम के भाई | Lakshmana, Rama’s brother |
| हरषाई | प्रसन्न होकर | joyfully |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.62
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 831
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 831, 832
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।