लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जागा निसिचर देखिअ कैसा। मानहुँ कालु देह धरि बैसा।।
मूल पाठ
जागा निसिचर देखिअ कैसा। मानहुँ कालु देह धरि बैसा।।
कुंभकरन बूझा कहु भाई। काहे तव मुख रहे सुखाई।।
स्रोत अभिलेख 6.62 · पुस्तक पृ. 831, 832
भावार्थ
मूल पाठ के बादकुम्भकर्ण जगा (उठ बैठा)। वह कैसा दिखायी देता है मानो स्वयं काल ही शरीर धारण करके बैठा हो। कुम्भकर्णने पूछा—हे भाई! कहो तो, तुम्हारे मुख सूख क्यों रहे हैं?॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 832 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जागा निसिचर देखिअ कैसा। मानहुँ कालु देह धरि बैसा।।
English explanation
Behold how the demon looked when he awoke—as though Death itself had taken bodily form and sat there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जागा | जाग उठा | awoke |
| निसिचर | राक्षस कुंभकर्ण | the demon Kumbhakarna |
| देखिअ | देखो | behold |
| कैसा | कैसा दिखाई देता है | what he looks like |
| मानहुँ | मानो | as though |
| कालु | काल; मृत्यु | Death personified |
| देह | शरीर | a body |
| धरि | धारण करके | assuming |
| बैसा | बैठा हो | sat there |
2 कुंभकरन बूझा कहु भाई। काहे तव मुख रहे सुखाई।।
English explanation
Kumbhakarna asked, ‘Tell me, brother, why is your face so drawn?’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुंभकरन | कुंभकर्ण ने | Kumbhakarna |
| बूझा | पूछा | asked |
| कहु | बताओ | tell me |
| भाई | हे भाई | brother |
| काहे | क्यों | why |
| तव | तुम्हारा | your |
| मुख | मुख; चेहरा | face |
| रहे | रहा है | is remaining |
| सुखाई | सूखा हुआ; मुरझाया | dry; drawn |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.62
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 832
- सहायक विषय
- श्रीरामजीकी प्रलापलीला, हनुमान्जीका लौटना, लक्ष्मणजीका उठ बैठना
- मुद्रित पृष्ठ
- 831, 832
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।