लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मीन कमठ सूकर नरहरी। बामन परसुराम बपु धरी।।
मूल पाठ
मीन कमठ सूकर नरहरी। बामन परसुराम बपु धरी।।
जब जब नाथ सुरन्ह दुखु पायो। नाना तनु धरि तुम्हइँ नसायो।।
स्रोत अभिलेख 6.11 · पुस्तक पृ. 888, 889
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपने ही मत्स्य, कच्छप, वाराह, नृसिंह, वामन और परशुरामके शरीर धारण किये। हे नाथ! जब- जब देवताओंने दु:ख पाया, तब-तब अनेकों शरीर धारण करके आपने ही उनका दु:ख नाश किया॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 889 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मीन कमठ सूकर नरहरी। बामन परसुराम बपु धरी।।
English explanation
You assumed the forms of the Fish, Tortoise, Boar, Man-Lion, Vamana, and Parashurama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मीन | मत्स्य, मछली का अवतार | the Fish incarnation |
| कमठ | कच्छप, कछुए का अवतार | the Tortoise incarnation |
| सूकर | वराह, सूअर का अवतार | the Boar incarnation |
| नरहरी | नरसिंह, मनुष्य-सिंह अवतार | the Man-Lion incarnation |
| बामन | वामन, बौने ब्राह्मण का अवतार | Vamana, the dwarf Brahmin incarnation |
| परसुराम | परशुराम, परशुधारी अवतार | Parashurama, the axe-bearing incarnation |
| बपु | शरीर, रूप | bodies; forms |
| धरी | धारण किए | assumed |
2 जब जब नाथ सुरन्ह दुखु पायो। नाना तनु धरि तुम्हइँ नसायो।।
English explanation
O Lord, whenever the gods suffered, you yourself assumed various forms and dispelled their suffering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| जब | जब; हर बार | whenever; each time |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| सुरन्ह | देवताओं ने | the gods |
| दुखु | दुःख | suffering |
| पायो | पाया, अनुभव किया | experienced |
| नाना | विविध | various |
| तनु | शरीर, रूप | bodies; forms |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| तुम्हइँ | आपने ही | you yourself |
| नसायो | दुःख दूर किया | dispelled their suffering |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 889
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 888, 889
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