लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह समरूप ब्रह्म अबिनासी। सदा एकरस सहज उदासी।।
मूल पाठ
तुम्ह समरूप ब्रह्म अबिनासी। सदा एकरस सहज उदासी।।
अकल अगुन अज अनघ अनामय। अजित अमोघसक्ति करुनामय।।
स्रोत अभिलेख 6.11 · पुस्तक पृ. 888, 889
भावार्थ
मूल पाठ के बादआप समरूप, ब्रह्म, अविनाशी, नित्य, एकरस, स्वभावसे ही उदासीन (शत्रु-मित्र-भावरहित), अखण्ड, निर्गुण (मायिक गुणोंसे रहित), अजन्मा, निष्पाप, निर्विकार, अजेय, अमोघशक्ति (जिनकी शक्ति कभी व्यर्थ नहीं होती) और दयामय हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 889 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तुम्ह समरूप ब्रह्म अबिनासी। सदा एकरस सहज उदासी।।
English explanation
You are the imperishable Brahman, impartial in nature, ever unchanging and naturally unattached.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | आप | you |
| समरूप | समभावस्वरूप | impartial and uniform in nature |
| ब्रह्म | परम तत्त्व ब्रह्म | Brahman, the ultimate reality |
| अबिनासी | अविनाशी | imperishable |
| सदा | सदैव | always |
| एकरस | एक समान, अपरिवर्तित | unchanging; ever the same |
| सहज | स्वभाव से | by nature |
| उदासी | निर्लिप्त | unattached |
2 अकल अगुन अज अनघ अनामय। अजित अमोघसक्ति करुनामय।।
English explanation
You are indivisible, beyond the qualities of nature, unborn, sinless, free from affliction, unconquerable, unfailing in power, and full of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अकल | अविभाज्य, अंशरहित | indivisible; without parts |
| अगुन | प्रकृति के गुणों से परे | beyond the qualities of nature |
| अज | अजन्मा | unborn |
| अनघ | निष्पाप, निर्दोष | sinless; faultless |
| अनामय | रोग और विकार से रहित | free from disease and affliction |
| अजित | अजेय | unconquerable |
| अमोघसक्ति | जिसकी शक्ति निष्फल नहीं होती | whose power never fails |
| करुनामय | करुणा से पूर्ण | full of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 889
- सहायक विषय
- देवताओंकी स्तुति, इन्द्रकी अमृत-वर्षा
- मुद्रित पृष्ठ
- 888, 889
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।