लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे। फिरे एक एकन्ह तब टेरे।।
मूल पाठ
भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे। फिरे एक एकन्ह तब टेरे।।
प्रभु बलु पाइ भालु कपि धाए। तरल तमकि संजुग महि आए।।
स्रोत अभिलेख 6.97 · पुस्तक पृ. 871, 871
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरघुनाथजीने भुजा उठाकर सब वानरोंको लौटाया। तब वे एक दूसरेको पुकार-पुकारकर लौट आये। प्रभुका बल पाकर रीछ-वानर दौड़ पड़े। जल्दीसे कूदकर वे रणभूमिमें आ गये॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 871 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 भुज उठाइ रघुपति कपि फेरे। फिरे एक एकन्ह तब टेरे।।
English explanation
Rama, lord of Raghu’s lineage, raised his arm and called the monkeys back. They returned and then called out to one another.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भुज | भुजा | his arm |
| उठाइ | उठाकर | raising |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम ने | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| कपि | वानरों को | the monkeys |
| फेरे | वापस बुलाया | called back |
| फिरे | लौट आए | returned |
| एक | एक ने | one |
| एकन्ह | दूसरे को | another |
| तब | तब | then |
| टेरे | पुकारा | called out to |
2 प्रभु बलु पाइ भालु कपि धाए। तरल तमकि संजुग महि आए।।
English explanation
Strengthened by the Lord, the bears and monkeys rushed forward; swift and fired with ardor, they entered the battle.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रभु | प्रभु राम का | Lord Rama’s |
| बलु | बल | strength |
| पाइ | पाकर | having received |
| भालु | भालू | bears |
| कपि | वानर | monkeys |
| धाए | दौड़ पड़े | rushed forward |
| तरल | फुर्तीले होकर | moving swiftly |
| तमकि | जोश में भरकर | fired with ardor |
| संजुग | युद्ध | battle |
| महि | में | into |
| आए | आए | came |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 871
- सहायक विषय
- घोर युद्ध, रावणकी मूर्च्छा
- मुद्रित पृष्ठ
- 871, 871
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।