लङ्काकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अस्तुति करत देवतन्हि देखें। भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें।।
मूल पाठ
अस्तुति करत देवतन्हि देखें। भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें।।
सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल। अस कहि कोपि गगन पर धायल।।
स्रोत अभिलेख 6.97 · पुस्तक पृ. 871, 871
भावार्थ
मूल पाठ के बाददेवताओंको श्रीरामजीकी स्तुति करते देखकर रावणने सोचा, मैं इनकी समझमें एक हो गया। [परन्तु इन्हें यह पता नहीं कि इनके लिये मैं एक ही बहुत हूँ ] और कहा—अरे मूर्खो! तुम तो सदाके ही मेरे मरैल (मेरी मार खानेवाले) हो। ऐसा कहकर वह क्रोध करके आकाशपर [देवताओंकी ओर] दौड़ा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 871 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अस्तुति करत देवतन्हि देखें। भयउँ एक मैं इन्ह के लेखें।।
English explanation
Ravana saw the gods offering praise and thought: ‘In their reckoning, I have now become just one.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस्तुति | स्तुति | praise |
| करत | करते हुए | offering |
| देवतन्हि | देवताओं को | the gods |
| देखें | देखा | saw |
| भयउँ | हो गया हूँ | have become |
| एक | एक ही | just one |
| मैं | मैं | I |
| इन्ह | इन देवताओं | these gods |
| के | के | in their |
| लेखें | विचार में | reckoning |
2 सठहु सदा तुम्ह मोर मरायल। अस कहि कोपि गगन पर धायल।।
English explanation
‘You fools, you have always been beaten by me!’ Saying this, Ravana angrily rushed toward the sky.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सठहु | हे मूर्खो | you fools |
| सदा | सदा | always |
| तुम्ह | तुम | you |
| मोर | मेरे द्वारा | by me |
| मरायल | मारे-पिटे हुए | beaten |
| अस | ऐसा | this |
| कहि | कहकर | having said |
| कोपि | क्रोधित होकर | becoming angry |
| गगन | आकाश | the sky |
| पर | की ओर | toward |
| धायल | दौड़ा | rushed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- लङ्काकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 6.97
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 871
- सहायक विषय
- घोर युद्ध, रावणकी मूर्च्छा
- मुद्रित पृष्ठ
- 871, 871
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।